Contact Us: +919899053066

Stories of Endurance

गर्भ में पल रही बेटी कर रही है चीख पुकार, हिम्मत है तो माँ मुझे पैदा कर के मार |

चलिए आज ले चलते हैं आपको दिल्ली के प्रेम विहार में..
बात जून 2019 की है, जब हम यूथ वीरांगनाएं महिला दिवस के उपलक्ष में दिल्ली में रैली निकाल रही थीं| दूर से ही रैली को देखते हुए प्रेम नगर निवासी दीपक कुमार अपनी गाड़ी का हॉर्न लगातार बजाने लगे| उन्होंने खिड़की का शीशा नीचे किया और हम वीरांगनाओ को रास्ता छोड़ने के लिए कहना चाहा| ठीक उसी पल कुछ वीरांगनाऐं एक नारा लगा रही थी, जो कि इस प्रकार था-
गर्भ में पल रही बेटी कर रही है चीख पुकार,
हिम्मत है तो माँ मुझे पैदा कर के मार|
इतना सुनती ही दीपक और बगल में बैठी उसकी बीवी अंजू देवी का चेहरा उतर गया| अंजू देवी अपने पति को रोते हुए वापिस घर जाने को कहने लगी| कुछ वीरांगनाओं ने जब उनसे बात करनी चाही तब पता चला कि उनकी 5 साल की एक बेटी है और एक और बेटी होने वाली है, जिसके कारण वो गर्भपात करवाने जा रहे थे| यूथ वीरांगनाओं की बाते सुनकर उनका ह्रदय परिवर्तन हो गया| उन्होंने उस बच्ची को जन्म दिया और आज वो बच्ची उस परिवार की लाडली है|

घर नही मानो नर्क में जीती हूँ मै

आज हम बात करेंगे पंजाब के जिला पटियाला के गाँव देवीगढ़ की रहने वाली ज्योति रानी के बारे में…
दिसंबर 2019 में यूथ वीरांगनाओं ने आयोजन किया नशा विरोधी एक नुक्कड़ नाटक का| कार्यक्रम के दौरान पड़ोस में रहने वाली ज्योति रानी भी वहाँ आई और प्रभावित होकर आपबीती सुनाने लगी| ज्योति ने बताया कि उनके घर की हालत कुछ ठीक नहीं है| उनके पति एक स्कूल बस चालक हैँ जो दिन में जितना भी कमाते है उतने की ही शराब पी लेते हैं और दूसरे नशे भी करते हैं। आये दिन मार पिटाई लड़ाई झगड़े होते हैं। घर नही मानो नर्क में जीती हूँ मै।| यह सुनकर हम वीरांगनाओ ने ज्योति के पति से बात की और उन्हें नशे के दुष्प्रभाव के बारे में बताया| साथ ही अपने खर्चे पर उसे दवाईयां दिलवाई और योगा के लिए प्रेरित किया एवं कुछ समय counselling भी की। वीरांगनाओ ने ज्योति को भी वीरांगनाओ के द्वारा चलते आ रहे मुफ्त सिलाई केंद्र में सिलाई सिखाई | लगभग 6 महीने बाद जब हम वीरांगनाएं उसी गांव में किसी कार्यक्रम के सिलसिले में दोबारा गए तो ज्योति और उसका पति बहुत ही प्यार से आकर मिले| अब ज्योति की ज़िन्दगी बिलकुल बदल चुकी थी| आज ज्योति और उसका पति दोनों कमा रहे हैं और उनका एक हँसता खेलता खुशहाल परिवार है |

enduranc

Nisha is survived by her ailing father and two brothers. Even being slightly polio affected, she did not take out the zeal of living life. She was slowly convinced by Youth Veerangnayen volunteers to earn a living and support her family. Over a period of time, she learnt tailoring at one of the centers run by volunteers. She ,with their help, started earning livelihood by started stitching clothes for locals and thereby supporting her family of father and younger brother and sister.

She served as an inspiration for other girls in the centers and there were many like Jaspreet, Gintanjali, Seema, Sunita, Neelam, Babli, Sudesh and Munni who looked upto her and have started making living out of their own.